45 की उम्र, 14 करोड़ कार्यकर्ता और 2029 का दबाव – BJP के नए कप्तान की अग्निपरीक्षा

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बड़ा दांव खेला है। 45 साल की उम्र में वे न सिर्फ BJP के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, बल्कि पार्टी के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष भी हैं।

चुनाव भले ही निर्विरोध रहा हो, लेकिन राजनीति में असली परीक्षा कुर्सी मिलने के बाद शुरू होती है — और नितिन नबीन के सामने चुनौतियों की पूरी फेहरिस्त खड़ी है।

उम्र नहीं, ओहदा देखें – हाईकमान का साफ संदेश

पार्टी हाईकमान ने करीब 14 करोड़ BJP सदस्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं — नितिन नबीन को उम्र से नहीं, पद की गरिमा से ट्रीट किया जाए।

मतलब साफ है- Young President, लेकिन Authority Full Power Mode में। अब चुनौती यह है कि वरिष्ठ नेताओं का अनुभव और युवा नेताओं का जोश इन दोनों के बीच Balance बनाए रखा जाए, वरना संगठन में फ्रिक्शन तय है।

Expansion Mode ON रखना सबसे बड़ा टेस्ट

पिछले 10 सालों में BJP का विस्तार उसकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। अब नितिन नबीन के सामने सवाल है — क्या 2029 तक यही Growth Momentum बना रहेगा? क्योंकि 2029 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए नए वोटर्स, नए सामाजिक समूह और नए क्षेत्र को लगातार जोड़ना ज़रूरी होगा।

South India: BJP की सबसे Tough Frontier

नितिन नबीन की अग्निपरीक्षा 2026 में ही शुरू हो जाएगी। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं-

  • पश्चिम बंगाल
  • तमिलनाडु
  • केरल
  • पुडुचेरी
  • असम

हकीकत यह है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में BJP आज तक सत्ता में नहीं आई। वहीं असम में तीसरी बार पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाना भी आसान नहीं होगा।

कर्नाटक से लेकर राज्यों तक – अंदरुनी कलह बड़ी चुनौती

कर्नाटक में चल रही अंदरूनी खींचतान नितिन नबीन के लिए Headache बनी हुई है। साथ ही अन्य राज्यों में भी स्थानीय गुटबाजी नेतृत्व संघर्ष टिकट विवाद को खत्म कर Coordination Model लागू करना होगा। क्योंकि पार्टी इस वक्त करीब 25 राज्यों में सत्ता में है —
लेकिन BJP का लक्ष्य साफ है- “बाकी बचे राज्यों में भी कमल खिलाना।”

जातिगत जनगणना: Politics का Game Changer

नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है — देश की पहली जातिगत जनगणना। इसके असर- OBC और General वर्ग की वास्तविक संख्या सामने आएगी। कई राज्यों के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। जाति आधारित राजनीति और तेज होगी। BJP को नए Social Equations के साथ Fine-Tuning करनी होगी।

महिला आरक्षण + परिसीमन = नई राजनीति

जातिगत जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन और 33% महिला आरक्षण लागू होगा। मतलब राजनीति में बड़ी संख्या में नई महिला चेहरे आएंगे।

इन महिलाओं को टिकट, संगठन और जीत तक पहुंचाना नितिन नबीन के लिए एक बड़ा Strategic Task होगा।

2029 की राह आसान नहीं

2024 लोकसभा चुनाव ने BJP को Reality Check दिया। 400 पार का नारा अधूरा रह गया। सीटें 350 से नीचे रहीं। उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा झटका लगा अब 2029 का चुनाव नए परिसीमन + महिला आरक्षण + बदले जातीय समीकरण के साथ होगा। यानि Old Formula ≠ Guaranteed Victory

Young Face, Heavy Expectations

नितिन नबीन के पास संगठन, सत्ता, और संसाधन तीनों हैं। लेकिन असली सवाल यही है क्या वे Experience Deficit को Strategy से कवर कर पाएंगे? क्योंकि राजनीति में उम्र मायने नहीं रखती, Result रखता है।

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